बीकानेर: नेत्रहीन नाबालिग को पारिवारिक उत्पीड़न से छुड़ाया, पुलिस की संवेदनशीलता ने जीता दिल, गले लगकर बोली ‘थैंक यू दीदी’
बीकानेर। Bikaner के मुक्ताप्रसाद नगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए एक नेत्रहीन नाबालिग बालिका को कथित पारिवारिक उत्पीड़न से मुक्त कराया। इस कार्रवाई ने खाकी वर्दी के पीछे छिपे मानवीय चेहरे को सामने ला दिया।
यह है पूरा मामला
थानाधिकारी विजेंद्र शीला के अनुसार, रविवार को पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि एक नाबालिग बालिका को घर में बंधक बनाकर रखा गया है और उसके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बालिका को सुरक्षित बाहर निकाला।
दर्द भरी दास्तान
पुलिस द्वारा बातचीत करने पर बालिका ने बताया कि उसे घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाती थी और उसकी देखभाल भी ठीक तरीके से नहीं की जा रही थी। नेत्रहीन होने के कारण वह पूरी तरह दूसरों पर निर्भर थी, लेकिन इसी का फायदा उठाकर उसके साथ उपेक्षा और उत्पीड़न किया जा रहा था। यह सुनकर पुलिसकर्मी भी भावुक हो उठे।
तुरंत कार्रवाई, सुरक्षित ठिकाना
पुलिस ने मौके पर मौजूद परिजनों को कड़ी फटकार लगाई और बालिका को तत्काल Child Welfare Committee (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश किया। समिति के निर्देश पर उसे नारी निकेतन भेजा गया, जहां अब वह सुरक्षित माहौल में रह रही है। इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक सुरेश और महिला सिपाही सुमन की अहम भूमिका रही।
“थैंक यू दीदी” में दिखा भरोसा
सुरक्षित वातावरण मिलने के बाद बालिका महिला सिपाही सुमन के पास गई और उन्हें गले लगाकर “थैंक यू दीदी” कहा। उसकी आंखों से बहते आंसुओं में दर्द के साथ राहत और विश्वास साफ झलक रहा था। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गया।
अब नई शुरुआत
पारिवारिक उत्पीड़न से डरी सहमी बालिका को पुलिस ने भरोसा दिलाया कि अब वह पूरी तरह सुरक्षित है। साथ ही उसे यह आश्वासन भी दिया गया कि भविष्य में प्रशासन की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों के लिए सहारा और सुरक्षा का मजबूत स्तंभ भी है।




