बड़ी खबर: भारत में सूखा और भीषण गर्मी का खतरा, सुपर अल-नीनो से कमजोर पड़ सकता है मानसून
नई दिल्ली। देश में इस साल मानसून को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। सामान्य से कम बारिश के अनुमान के बीच अब “सुपर अल-नीनो” के सक्रिय होने की आशंका जताई गई है। अमेरिकी मौसम एजेंसी नोआ (NOAA) के अनुसार मई से जुलाई के बीच सुपर अल-नीनो प्रभावी हो सकता है और इसके सर्दियों तक बने रहने की संभावना है। इससे भारत में सूखा, भीषण गर्मी और कमजोर मानसून जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
नोआ की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से करीब 0.5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। एजेंसी का कहना है कि यह गर्म स्थिति पूरे मानसून सीजन के दौरान बनी रह सकती है। पिछले महीने सुपर अल-नीनो की संभावना 61 प्रतिशत बताई गई थी, जो अब बढ़कर 82 प्रतिशत हो गई है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि अल-नीनो का सीधा असर मानसून की बारिश पर पड़ सकता है। इससे देश में सूखे का खतरा और बढ़ जाएगा।
क्या होता है अल-नीनो?
अल-नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इसके कारण हवा के पैटर्न में बदलाव आता है और दुनियाभर में बारिश का चक्र प्रभावित होता है। कहीं भारी बारिश और बाढ़ आती है तो कहीं सूखा और भीषण गर्मी पड़ती है।
विशेषज्ञों के अनुसार जब अल-नीनो सक्रिय होता है, तब यह भारत की ओर आने वाली मानसूनी हवाओं को कमजोर कर देता है, जिससे बारिश कम हो जाती है।
82% बढ़ी सुपर अल-नीनो की संभावना
नोआ के नए अपडेट के अनुसार मई से जुलाई 2026 के बीच सुपर अल-नीनो विकसित होने की 82 प्रतिशत संभावना है। वहीं इसके दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक जारी रहने की आशंका 96 प्रतिशत बताई गई है। इसके “स्ट्रॉन्ग” या “वेरी स्ट्रॉन्ग” रहने की संभावना करीब 67 प्रतिशत है।
इस स्थिति से कमजोर मानसून, लंबे सूखे और हीटवेव का खतरा बढ़ सकता है।
दुनिया पर क्या पड़ेगा असर?
भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में सामान्य से कम बारिश हो सकती है।
कई इलाकों में भीषण गर्मी और सूखे की स्थिति बन सकती है।
इंडोनेशिया और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में जंगलों में आग का खतरा बढ़ सकता है। मध्य प्रशांत क्षेत्र में भारी बारिश और चक्रवात की आशंका बढ़ेगी।
भारत के कौन से इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित?
उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बनने का सबसे ज्यादा खतरा बताया गया है। इससे खेती और जलस्रोतों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान अगस्त-सितंबर के दौरान सबसे संवेदनशील राज्यों में शामिल माने जा रहे हैं। वहीं मध्य प्रदेश के इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर और नर्मदापुरम संभागों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है।
हालांकि लद्दाख, राजस्थान के कुछ हिस्सों, तेलंगाना और उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में इसका असर अपेाकृत कम रहने की संभावना जताई गई है।
ज्यादा बारिश के बावजूद बढ़ रहा सूखा
वैज्ञानिकों के अनुसार दुनिया में कुल बारिश भले बढ़ रही हो, लेकिन जमीन और इकोसिस्टम पहले से ज्यादा सूखे होते जा रहे हैं। नेचर जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक अब बारिश पूरे साल समान रूप से नहीं होती, बल्कि कम समय में तेज तूफानी दौर के रूप में होती है। इसके बाद लंबे समय तक ड्राई स्पेल बना रहता है।
ऐसी स्थिति में मिट्टी एक साथ गिरे भारी पानी को पूरी तरह सोख नहीं पाती और पानी तेजी से बह जाता है या भाप बनकर उड़ जाता है। इससे जमीन में नमी कम होती जा रही है।






