2 साल से रिहायशी इलाके में चल रही थी मौत की फैक्ट्री, प्रशासन चेतता तो बच सकती थीं 8 जानें
जयपुर के खोह नागोरियान के रिहायशी इलाके में संचालित पटाखा फैक्ट्री पिछले दो साल से अधिक समय से चल रही थी। फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की जा रही थी। न तो अग्निशमन यंत्र मौजूद थे और न ही किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक सुरक्षा संसाधन उपलब्ध थे। ऐसे में अब पुलिस का कहना है कि फैक्ट्री संचालन के लिए आवश्यक लाइसेंस भी नहीं लिया गया था। विस्फोटक सामग्री के निर्माण और भंडारण जैसे संवेदनशील कार्य के बावजूद यह इकाई घनी आबादी वाले क्षेत्र में संचालित होती रही। लेकिन इस पर संबंधित विभागों की नजर नहीं पड़ी। देश में पटाखा निर्माण कारखानों और भंडारण (गोदाम) के लिए कड़े सुरक्षा मानक निर्धारित हैं। ये मुख्य रूप से विस्फोटक अधिनियम, 1884, विस्फोटक नियम, 2008 तथा पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (पेसो) के दिशा-निर्देशों के तहत लागू होते हैं। आग और विस्फोट की घटनाओं को रोकने के लिए निम्न प्रमुख मानक होने चाहिए।
ये तो होना ही था क्योंकि…
नियमों मेंः लाइसेंस और स्वीकृति पेसो से लाइसेंस अनिवार्य है। स्थानीय निकाय, अग्निशमन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आवश्यक स्वीकृतियां हों।
जमीन पर: इनमें से कुछ भी नहीं।
नियमों में: कारखाना और गोदाम घनी आबादी से दूर स्थापित किए जाएं। भवनों, सड़कों और अन्य इकाइयों से न्यूनतम सुरक्षित दूरी निर्धारित होती है।
जमीन परः रिहायशी घर अगल-बगल हैं।
नियमों में: पटाखों की मिक्सिग, भराई, सुखाने, पैकिंग और भंडारण के लिए अलग-अलग कमरे होने चाहिए।
मौके परः एक छोटे से भवन में सभी कुछ किया जा रहा था।
नियमों में: प्रत्येक शिफ्ट में निर्धारित संख्या से श्रमिक हों और तय मात्रा में रसायन या तैयार माल नहीं रखा जाए।
जमीन परः कोई निगरानी नहीं
नियमों में: फायर एक्सटिंग्विशर, पानी, रेत अन्य अग्निशमन संसाधन।
जमीन पर: कुछ नहीं।




