ईरान vs अमेरिका: परमाणु जंग का खतरा? ट्रम्प के बयान से दुनिया में हलचल, ईरानी ने फिर ठुकराया ऑफर
राजस्थानी चिराग। डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। फ्लोरिडा में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा कि अगर अमेरिका समय रहते कार्रवाई नहीं करता, तो इजराइल, मिडिल ईस्ट और यूरोप के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता था।
ट्रम्प ने अपने संबोधन में कहा कि “हम ऐसे पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं जाने दे सकते। अगर हमने कार्रवाई नहीं की होती, तो पूरी दुनिया की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती।” उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने मिडिल ईस्ट को एक बड़े परमाणु खतरे से बचा लिया है।
ईरान के प्रस्ताव को फिर ठुकराया
ट्रम्प ने बताया कि ईरान ने 26 और 27 अप्रैल को बातचीत के लिए प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अमेरिका ने उसे ठुकरा दिया। व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार ईरान के नए प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम का जिक्र ही नहीं था, जिससे अमेरिका असंतुष्ट है।
अमेरिका चाहता है कि ईरान पहले अपने समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम को सौंपे और परमाणु कार्यक्रम पर स्पष्ट समझौता करे, जबकि ईरान का कहना है कि पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाए और बाद में परमाणु मुद्दे पर बातचीत की जाए। यही मतभेद बातचीत में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है।
समुद्री नाकाबंदी से ईरान को बड़ा नुकसान
अमेरिका की समुद्री नाकाबंदी के कारण ईरान को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान को करीब 4.8 अरब डॉलर (लगभग ₹45,600 करोड़) के तेल राजस्व का नुकसान हुआ है।
पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने कहा कि नाकाबंदी का असर साफ दिख रहा है और इससे ईरान की आर्थिक क्षमता कमजोर हुई है।
ईरान की प्रतिक्रिया: “अमेरिका हताश”
ईरान ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा है कि असल में अमेरिका जंग हार चुका है और इस तरह के बयान उसकी हताशा को दर्शाते हैं। दक्षिण अफ्रीका में ईरानी दूतावास ने कहा कि अमेरिका झूठे दावे कर रहा है।
वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका को धमकी भरी भाषा बंद करनी होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया और वह अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
खाड़ी देशों को हथियार देगा अमेरिका
मिडिल ईस्ट में अपने सहयोगियों को मजबूत करने के लिए अमेरिका ने 8.6 अरब डॉलर (करीब ₹800 अरब) के हथियार सौदों को मंजूरी दी है। इसमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और अन्य सैन्य उपकरण शामिल हैं। इस पैकेज में इजराइल के साथ-साथ कतर, कुवैत और यूएई भी शामिल हैं।
ट्रम्प का दावा: “ईरान की ताकत कमजोर”
ट्रम्प ने कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी हद तक कमजोर हो चुकी है। हालांकि उन्होंने माना कि बातचीत अभी उनकी उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए संसद की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है।
IRGC के 14 सैनिकों की मौत
इस बीच ईरान के जांजान प्रांत में एक विस्फोट में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के 14 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ जब सैनिक पुराने और बिना फटे गोला-बारूद को निष्क्रिय कर रहे थे।
होर्मुज में जहाजों की आवाजाही घटी
तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी कमी आई है। जहां पहले रोजाना करीब 130 जहाज गुजरते थे, अब यह संख्या घटकर 10 से भी कम रह गई है। इससे वैश्विक तेल सप्लाई पर गंभीर असर पड़ रहा है।
आगे क्या?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी टकराव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ अमेरिका सख्त रुख अपनाए हुए है, वहीं ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो हालात और बिगड़ सकते हैं, जिसका असर वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर साफ देखने को मिलेगा।






