पुलिसकर्मी पर “ड्रग-सिंडिकेट’ से सांठगांठ का आरोप,सीडीआर सेल से लीक हुई जानकारी, जांच में बड़ा खुलासा
बीकानेर। सूबे के सीमावर्ती जिले में पुलिस व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) सेल में तैनात हवलदार पर अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क की मदद करने का आरोप लगा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उसने पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आई लगभग 11 किलो हेरोइन की खेप के मामले में पुलिस टीम को गुमराह करने की कोशिश की। आरोपी हवलदार को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। मामला श्रीगंगानगर जिले का है।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, 26 मार्च को रावला थाना क्षेत्र में पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से गिराई गई करीब 10 किलो 830 ग्राम हेरोइन की खेप बरामद की गई थी। इस कार्रवाई में पुलिस और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त टीम ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। बरामदगी के बाद पुलिस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी थी इसी दौरान जांच में सामने आया कि सीडीआर सेल में तैनात हवलदार मंगतराम ने ऑपरेशन के दौरान फोन लोकेशन और कॉल डिटेल्स से जुड़ी गलत जानकारी देकर पुलिस टीम को भ्रमित किया। इससे तस्करों को फायदा पहुंचने की आशंका जताई गई।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
करीब एक महीने तक चली गहन पड़ताल में यह खुलासा हुआ कि मंगतराम का संपर्क गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक से सीधे तौर पर था। कॉल रिकॉर्ड्स और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह कड़ी स्थापित की गई। इसके बाद उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी पुलिसकर्मी का संबंध किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट से था या नहीं। यदि आगे और कड़ियां जुड़ती हैं, तो मामला और गंभीर हो सकता है।
सीमावर्ती इलाकों में बढ़ती ड्रोन तस्करी की चुनौती
श्रीगंगानगर और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से ड्रोन के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी के मामले बढ़े हैं। सुरक्षा एजेंसियां लगातार इस नेटवर्क को तोड़ने के प्रयास में जुटी हैं। ऐसे में पुलिस तंत्र के भीतर से मिलीभगत की आशंका ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस का आधिकारिक बयान
जिला पुलिस अधीक्षक हरिशंकर यादव ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि सीडीआर सेल में तैनात हवलदार ने ऑपरेशन के दौरान टीम को गुमराह करने का प्रयास किया था। जांच में उसके संदिग्ध संपर्क सामने आने पर उसे निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।




