राजस्थान में सस्ती बिजली पर संकट: इन 3 वजह से इन उपभोक्ताओं को नहीं मिल सकेगी सस्ती बिजली!
राजस्थान में सौर ऊर्जा उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अब यही उपलब्धि नई चुनौती बनती नजर आ रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि उत्पादन होने के बावजूद बड़ी मात्रा में बिजली का उपयोग नहीं हो पा रहा और प्लांट्स को उत्पादन रोकना पड़ रहा है। इस स्थिति को ‘सोलर ओवरफ्लो’ कहा जा रहा है।
राज्य के भड़ला सोलर पार्क से सामने आई कर्टेलमेंट रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े उजागर किए हैं। बिजली कंपनियों के अनुसार अप्रैल के पहले पखवाड़े में करीब 47 लाख यूनिट बिजली बेकार चली गई। दिन के समय मांग कम और उत्पादन ज्यादा होने के कारण कई बार 15% से लेकर 64% तक सोलर उत्पादन रोकना पड़ा।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सस्ती सोलर बिजली उपलब्ध होने के बावजूद उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रही है। वहीं प्रदेश में हर दिन 10 से 12 मेगावाट नई सोलर क्षमता जुड़ रही है, जिससे आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है।
तीन प्लांट्स में हुआ बड़ा नुकसान
100 मेगावाट प्लांट: 16.19 लाख यूनिट बिजली बेकार, करीब 40 लाख का नुकसान
100 मेगावाट प्लांट: 15.50 लाख यूनिट बिजली बेकार, करीब 38 लाख का नुकसान
250 मेगावाट प्लांट: 15.50 लाख यूनिट बिजली बेकार, करीब 51 लाख का नुकसान
इन दिनों में स्थिति रही सबसे गंभीर
1 अप्रैल को 15% कर्टेलमेंट (सबसे कम)
11 अप्रैल को 61% कर्टेलमेंट (सबसे ज्यादा)
9 से 15 अप्रैल के बीच लगातार उत्पादन रोकना पड़ा
सस्ती बिजली क्यों नहीं मिल पा रही? ये हैं 4 बड़ी वजहें
ग्रिड क्षमता की कमी: पर्याप्त ट्रांसमिशन नेटवर्क नहीं होने से अतिरिक्त बिजली सप्लाई नहीं हो पा रही। स्टोरेज सिस्टम का अभाव: बैटरी या अन्य स्टोरेज तकनीक विकसित नहीं होने से बिजली को संग्रहित नहीं किया जा सका।लोड मैनेजमेंट की कमजोरी: डिस्कॉम स्तर पर संतुलन सही तरीके से नहीं हो पा रहा। डिमांड-सप्लाई असंतुलन: दिन में उत्पादन ज्यादा, लेकिन खपत कम रही।
क्या हैं समाधान?
ट्रांसमिशन नेटवर्क और इंटर-स्टेट कनेक्टिविटी मजबूत की जाए
बड़े स्तर पर बैटरी स्टोरेज सिस्टम विकसित किए जाएं
टाइम-ऑफ-डे टैरिफ लागू कर दिन में खपत बढ़ाई जाए
अतिरिक्त बिजली का उपयोग ग्रीन हाइड्रोजन जैसे विकल्पों में किया जाए
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा है कि सौर ऊर्जा प्रदेश की ताकत है और जनता को सस्ती बिजली देना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए 6000 मेगावाट क्षमता के बैटरी स्टोरेज सिस्टम पर काम शुरू कर दिया गया है।
वहीं पूर्व सीएमडी आर. जी. गुप्ता का कहना है कि सोलर उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन ग्रिड, स्टोरेज और मांग के बीच संतुलन नहीं बन पाया है। यदि समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या भविष्य में बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकती है।
कुल मिलाकर, राजस्थान में सौर ऊर्जा का बढ़ता उत्पादन जहां एक तरफ अवसर है, वहीं दूसरी तरफ सिस्टम की कमजोरियों के कारण यह चुनौती बनता जा रहा है। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो सस्ती बिजली का लाभ आम उपभोक्ता तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।






